Posts

Showing posts from June, 2019

मोहब्बत की नफरत

जिस दिन भगवान ने इस दुनिया को बनाने की शुरुवात की । सबसे पहले उन्होंने पहाड़ ,नदिया , वादियां,फूल ,पेड़ और सभी प्रकार के जानवर बनाए । इतने सृजन के बाद भी भगवान को लगा कि इन सब चीजों के लिए एक रक्षक होना चाहिए ,जो इनका संतुलन बना कर रखे ,इस विचार  भगवान ने अपनी सबसे सुंदर रचना ' मनुष्य' की निर्मिती की । मनुष्य को भगवान ने सोचने ,समझने और निर्णय लेने की शक्ति दी।परन्तु मनुष्य को अपनी इस काबिलियत पर दिन प्रतिदिन घमंड सा होने लगा ,भगवान ने सोचा कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन अवश्य ही मनुष्य स्वयं का विनाश कर बैठेगा । भगवान ने बहुत विचार के बाद सोचा कि एक ऐसी चीज बनाते है ,जो मनुष्य  भी अधिक प्यारी और शक्तिशाली हो और जो मनुष्य को नियंत्रित कर सके ।यह सब विचार कर भगवान ने फिर अपनी एक अद्भुत निर्मिती का परिचय दिया । इस बार उसने दुनिया की सबसे कीमती और शक्तिशाली चीज मोहब्बत की रचना की । अक्सर ऐसा कहा जाता है ,विशुद्ध चीजो की रचना नहीं होती वो प्रकट होती है । आखिर इंसानों के बीच मोहब्बत प्रकट हुई । लोग इसे पसंद करने लगे ।पर अंत में इंसान फिर अपनी घमंड की चपेट में आ गया । ...

आज़ादी

समझ नहीं आता शुरुआत कहा से की जानी चाहिए। खैर कभी ना कभी, किसी ना किसी तरह यह बात मुझे लिखनी ही थी, तो क्यों ना तुम्हारे माध्यम से ही इसे दुनिया से साझा किया जाए। मुझे पता नहीं तुम तक ये लेख पहुंचेगा भी या नहीं, पर मुझे पता है तुम्हें थोड़ा अजीब तो अवश्य लगेगा इसे देखते ही। ख़ैर नाम लेने की कोई खास जरूरत तो नहीं लगती मुझे, तो मै तुम्हारे बारे मे जो बताऊंगा वो मेरी इसी कहानी मे शामिल होगा और शायद उतना काफी है, तुम्हारे मनोहारी व्यक्तित्व को चित्रित करने के लिए। अक्सर हम सभी को चीज़े बीत जाने के बाद उनका मूल्य पता चलता है। कुछ ऐसा ही प्रेम के मामले मे होता है। कह नहीं सकता प्रेम था तुमसे, पर ये कहा जा सकता है कि मैंने ये जरूर सोचा था प्रेम हो सकता है तुमसे। वैसे तो हमारी बातें नहीं हुई जब तक हम साथ थे, तो हमारा दोस्त होना भी मुमकिन नहीं था। याद है, वो वक़्त पर जब हमारी मुलाकात हुई या यूं कहो पहली दफा जब सिर्फ तुम मुझसे मिलने आयी और मै तुमसे। एक दूसरे की बातें कितनी मिलती थी। तुम और मै दोनों ही नहीं चाहते थे कि हम किसी को खो दे, दोनों ही को लोग बातों से पसंद आते थे। हाँ, तुम्हारे गान...