मोहब्बत की नफरत

जिस दिन भगवान ने इस दुनिया को बनाने की शुरुवात की । सबसे पहले उन्होंने पहाड़ ,नदिया , वादियां,फूल ,पेड़ और सभी प्रकार के जानवर बनाए ।
इतने सृजन के बाद भी भगवान को लगा कि इन सब चीजों के लिए एक रक्षक होना चाहिए ,जो इनका संतुलन बना कर रखे ,इस विचार  भगवान ने अपनी सबसे सुंदर रचना ' मनुष्य' की निर्मिती की ।
मनुष्य को भगवान ने सोचने ,समझने और निर्णय लेने की शक्ति दी।परन्तु मनुष्य को अपनी इस काबिलियत पर दिन प्रतिदिन घमंड सा होने लगा ,भगवान ने सोचा कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन अवश्य ही मनुष्य स्वयं का विनाश कर बैठेगा ।
भगवान ने बहुत विचार के बाद सोचा कि एक ऐसी चीज बनाते है ,जो मनुष्य  भी अधिक प्यारी और शक्तिशाली हो और जो मनुष्य को नियंत्रित कर सके ।यह सब विचार कर भगवान ने फिर अपनी एक अद्भुत निर्मिती का परिचय दिया । इस बार उसने दुनिया की सबसे कीमती और शक्तिशाली चीज मोहब्बत की रचना की ।
अक्सर ऐसा कहा जाता है ,विशुद्ध चीजो की रचना नहीं होती वो प्रकट होती है ।
आखिर इंसानों के बीच मोहब्बत प्रकट हुई । लोग इसे पसंद करने लगे ।पर अंत में इंसान फिर अपनी घमंड की चपेट में आ गया ।  उसे महसूस हुआ कि मोहब्ब्त की वजह से उसकी जगह खतरे में पड़ गई है ।
अतः मोहब्बत से ऊपर जाने के लिए इंसान मोहब्बत को बदनाम करने लगा ।मोहब्बत नाम पर बलात्कार ,उत्पीड़न और परेशान करना जैसी हरकतें की जाने लगी ।
अब धीरे धीरे हाल यह होता चला गया कि आज लोग मोहब्बत को सबसे बुरा मानने लगे है । मोहब्बत करना संसार का सबसे बड़ा जुर्म बन चुका है ।लोगो को मोहब्बत से डर लगने लगा ।लोग किसी के करीब जाने से डरने लगे ।
आज जो बची मोहब्बत है ,उसे भी किसी न किसी तरह खत्म करने की कोशिश की  रही है ।
आज मोहब्बत खुद नफरत की मोहताज हुई बैठी है ।

मोहब्बत है हयात की लज्जत ,वरना कुछ लज्जत-ए-हयात नहीं
अगर इजाजत हो तो एक बात कहूं ,वो मगर खैर कोई बात नहीं।
_जान एलिया

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