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मोहब्बत की नफरत

जिस दिन भगवान ने इस दुनिया को बनाने की शुरुवात की । सबसे पहले उन्होंने पहाड़ ,नदिया , वादियां,फूल ,पेड़ और सभी प्रकार के जानवर बनाए । इतने सृजन के बाद भी भगवान को लगा कि इन सब चीजों के लिए एक रक्षक होना चाहिए ,जो इनका संतुलन बना कर रखे ,इस विचार  भगवान ने अपनी सबसे सुंदर रचना ' मनुष्य' की निर्मिती की । मनुष्य को भगवान ने सोचने ,समझने और निर्णय लेने की शक्ति दी।परन्तु मनुष्य को अपनी इस काबिलियत पर दिन प्रतिदिन घमंड सा होने लगा ,भगवान ने सोचा कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन अवश्य ही मनुष्य स्वयं का विनाश कर बैठेगा । भगवान ने बहुत विचार के बाद सोचा कि एक ऐसी चीज बनाते है ,जो मनुष्य  भी अधिक प्यारी और शक्तिशाली हो और जो मनुष्य को नियंत्रित कर सके ।यह सब विचार कर भगवान ने फिर अपनी एक अद्भुत निर्मिती का परिचय दिया । इस बार उसने दुनिया की सबसे कीमती और शक्तिशाली चीज मोहब्बत की रचना की । अक्सर ऐसा कहा जाता है ,विशुद्ध चीजो की रचना नहीं होती वो प्रकट होती है । आखिर इंसानों के बीच मोहब्बत प्रकट हुई । लोग इसे पसंद करने लगे ।पर अंत में इंसान फिर अपनी घमंड की चपेट में आ गया । ...

आज़ादी

समझ नहीं आता शुरुआत कहा से की जानी चाहिए। खैर कभी ना कभी, किसी ना किसी तरह यह बात मुझे लिखनी ही थी, तो क्यों ना तुम्हारे माध्यम से ही इसे दुनिया से साझा किया जाए। मुझे पता नहीं तुम तक ये लेख पहुंचेगा भी या नहीं, पर मुझे पता है तुम्हें थोड़ा अजीब तो अवश्य लगेगा इसे देखते ही। ख़ैर नाम लेने की कोई खास जरूरत तो नहीं लगती मुझे, तो मै तुम्हारे बारे मे जो बताऊंगा वो मेरी इसी कहानी मे शामिल होगा और शायद उतना काफी है, तुम्हारे मनोहारी व्यक्तित्व को चित्रित करने के लिए। अक्सर हम सभी को चीज़े बीत जाने के बाद उनका मूल्य पता चलता है। कुछ ऐसा ही प्रेम के मामले मे होता है। कह नहीं सकता प्रेम था तुमसे, पर ये कहा जा सकता है कि मैंने ये जरूर सोचा था प्रेम हो सकता है तुमसे। वैसे तो हमारी बातें नहीं हुई जब तक हम साथ थे, तो हमारा दोस्त होना भी मुमकिन नहीं था। याद है, वो वक़्त पर जब हमारी मुलाकात हुई या यूं कहो पहली दफा जब सिर्फ तुम मुझसे मिलने आयी और मै तुमसे। एक दूसरे की बातें कितनी मिलती थी। तुम और मै दोनों ही नहीं चाहते थे कि हम किसी को खो दे, दोनों ही को लोग बातों से पसंद आते थे। हाँ, तुम्हारे गान...

शांति-एक तपस्या

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आजकल के इस तेज भागते से शोरगुल भरे जीवन मे यदि कोई वस्तु सबसे ज्यादा खोजी जाती है तो वह है शांति। लोग बगीचों, मैदानों, पहाड़ों वगैरह जगहों पर सिर्फ खुदको दुनिया से दूर करने के लिए ले जाते रहे हैं। लेकिन क्या सचमुच कुछ लोगों से दूर हो जाना ही शांति प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। शायद नहीं, शांति तो मन की एक विशिष्ट अवस्था का नाम है, अर्थात हो सकता है कि आप दुनिया से दूर होकर भी बहुत बेचैन रहे और ये भी हो सकता है कि आप दुनिया के साथ होकर भी शांत रहे। अतः अब यह सवाल आता है, जबकि शांति का सीधा संबंध हमारे मन से है तो इसे प्राप्त कैसे किया जाए। कोई तो तरीका होता होगा चित की शांति का। वैसे तो कई तरह के योगासन हैं, जिनसे की हम अपने शरीर को शांत कर सकते हैं, परंतु मन की शांति के लिए आवश्यक है कि हम अपने सोच को नियंत्रित कर सके। असल मे शांति से यहाँ आशय उस अवस्था से है, जिसमे आप सारे संसार से दूर एक ऐसी अवस्था मे पहुंच जाते हैं, जहाँ आप खुद से बातें कर सकते हैं। जहाँ आप स्वयं का साक्षात्कार करते हैं, और अपने आप का अवलोकन कर पाते हैं। यही वह शांति होती है शायद जिसे आप वर्षो से तलाश रहे है...

सत्यमेव जयते

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सत्य एक ऐसा विषय है, जो अस्तित्व के परे है। यानि जब संसार मे कुछ ना होगा तब भी सत्य होगा। सत्य ना तो कभी बदलता है और ना कभी मिटाया जा सकता है। लेकिन सत्य सबके लिए एक जैसा नहीं होता। हो सकता है जो बातें आपके लिए सच प्रतीत होती है, वह किसी और के दृष्टिकोण से गलत हो। सत्य की एक और विवेचना ये हो सकती है कि हम सभी सत्य को कभी प्राप्त ही नहीं कर सकते। असल मे हम सब यात्रा करते है, एक निम्न सत्य से उच्च सत्य की ओर। ऐसे मे किसी भी कथन का पूर्णतः सत्य अथवा असत्य होना, परिस्थितियों पर निर्भर है। अब जैसा कि गांधीजी ने कहा था कि सत्य मे असीम शक्ति है। सत्य के मार्ग पर चलने पर हमे और  किसी व्रत का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। यूं भी कहा जा सकता है कि परमात्मा और सत्य एक ही है। केवल वही है जो सत्य है और सत्य यही है कि केवल वही है। परमेश्वर और सत्य दोनों ही अमर हैं। अब यह सोचना आता है कि विवादों के वक़्त दोनों ही पक्षों के मत सत्य ही लगते हैं, परंतु अर्ध सत्य झूठ से भी कई ज्यादा खतरनाक होता है। असल मे सत्य एक परिपूर्ण परिभाषा है। अतः अर्ध सत्य भी झूठ ही होता है। जितना आवश्यक सत्य कथन ह...

प्रेम

ना जाने क्यों? लोग इस शब्द अथवा इसकी अनुभूति को लेकर इतने चिंतित या उलझे हुए रहते हैं। यह तो श्वेत, सरल, सादा, लेकिन उच्चतम है। जिसे हम 'प्रेम' नाम से जानते है। जो शायद सबकी समझ म...

किनारे का पत्थर

माना कि शाम उस किनारे पर बड़ी ही मनोहारी होती है।पर उस सुबह वहां की हवा में कुछ अलग ही बात थी । वो किनारे पर बनी हुई कंक्रीट की सीमा जिस पर सूर्य की किरणे बड़ी बड़ी इमारतों के बीच में  होकर आती हो,मानो जैसे किसी आम के बाग में धूप, पत्तो के बीच से आती हो। हालंकि इस प्रकाश में वो शीतलता तो नहीं थी ,फिर भी सुबह ७:३० की धूप और इमारतों की मौजूदगी मौसम को ठंडक प्रदान कर रही थी । शायद ...शायद मौसम उस समय का भी हर दिन की तरह साधारण ही था ।शायद वह धूप भी उतनी ही तेज थी जितनी रोज होती थी। पर उसके इस अद्भुत सौन्दर्य का कारण किसी शख्स की मौजूदगी थी । वो जो मुस्कुराती तो कलियां शर्मा जाती ,वो जो एक नजर उठाती तो प्रकाश बिखर जाता ,जिसकी खुशबू किसी कस्तूरी से कम न थी ।माना कि कोई इतना खूबसूरत भी नहीं हो सकता, पर मेरी नज़र तो हमेशा उसे इसी तरह देखती थी। आज सुबह ही हम दोनों साथ समुन्द्र किनारे घूमने आए थे या यूं कहा हा सकता है, मैं आज अपने दिल की बात करने यहां आया था ।यह बताना चाहता उसे की वो कितनी जरूरी है मेरे जिंदगी में ,किस तरह सिर्फ उसकी जगह है मेरे दिल में,बस एक उसके पाने से मै कितना संतुष...

हाथ

याद है क्या तुम्हें... वो साथ चलते हुए, कभी एक दूसरे को हलके से स्पर्श करते हुए गुज़र जाने वाले, लड़खड़ाते हुए एक दूसरे से बचकर पर एक दूसरे हल्की हवा देकर चले जाने वाले, अगले पल, ए...