हाथ

याद है क्या तुम्हें...
वो साथ चलते हुए,
कभी एक दूसरे को हलके से स्पर्श करते हुए गुज़र जाने वाले,
लड़खड़ाते हुए एक दूसरे से बचकर पर एक दूसरे हल्की हवा देकर चले जाने वाले,
अगले पल, एक कोमल एहसास के साथ समीप आकर एक दूसरे से कुछ अनमने से लिपट जाने वाले,
फिर अचानक ही अपने सारी आकृति को खोल कर एक दूसरे को अपनी आगोश मे ले लेने वाले...
हाथों को आज तुम्हारी याद आ रही है,आओ इसे थाम लो.... आओ इसे थाम लो...

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